पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित नेताजी इंडोर स्टेडियम में स्थित स्ट्रांगरूम के बाहर बेलेघाटा विधानसभा से टीएमसी के उम्मीदवार कुणाल घोष टीएमसी नेताओं के साथ निगरानी करते नजर रखे हुए थे। कुणाल घोष ने कहा हमने बिना हमारे प्रतिनिधि के स्ट्रांग रूम के अंदर आवाजाही को लेकर सवाल उठाए थे। चुनाव आयोग ने अपनी गलती स्वीकार की और आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। एक और मुद्दा यह था कि डाक मतपत्रों के स्ट्रांग रूम के बाहर कोई सीसीटीवी या लाइव स्ट्रीमिंग स्क्रीन नहीं थी। हमने इस ओर ध्यान दिलाया और आज वहां कैमरे लगा दिए गए हैं। जब अंदर कोई आवाजाही हुई, तो हमारा प्रतिनिधि वहां मौजूद था और हम उसे स्क्रीन पर देख सकते थे। हमारे कार्यकर्ता चौबीसों घंटे निगरानी रख रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया के दौरान स्ट्रांगरूम की सुरक्षा और निगरानी हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दा रही है। इसी क्रम में कोलकाता स्थित नेताजी इंडोर स्टेडियम में बनाए गए स्ट्रांगरूम के बाहर उस समय खास हलचल देखने को मिली जब बेलेघाटा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार कुणाल घोष अपने समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ वहां मौजूद रहे और लगातार निगरानी करते नजर आए। चुनाव के बाद ईवीएम और अन्य जरूरी दस्तावेजों को स्ट्रांगरूम में सुरक्षित रखा जाता है, जिसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को भी निगरानी की अनुमति दी जाती है।
इसी प्रक्रिया के तहत कुणाल घोष और उनके साथ मौजूद टीएमसी नेताओं ने स्ट्रांगरूम के बाहर डेरा डाले रखा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की आशंका पर तुरंत नजर रखी जा सके। उनके साथ पार्टी के कई स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जो समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। इस दौरान वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसमें केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की तैनाती शामिल थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। कुणाल घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बेहद जरूरी है और स्ट्रांगरूम की सुरक्षा पर नजर रखना हर उम्मीदवार का अधिकार भी है और जिम्मेदारी भी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी उपस्थिति का उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं बल्कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं होता, बल्कि मतगणना तक हर चरण पर राजनीतिक दल पूरी सतर्कता बरतते हैं। कुल मिलाकर, नेताजी इंडोर स्टेडियम के स्ट्रांगरूम के बाहर टीएमसी उम्मीदवार कुणाल घोष और उनके समर्थकों की मौजूदगी चुनावी प्रक्रिया की गंभीरता और संवेदनशीलता को दर्शाती है, जहां हर कदम पर चौकसी और जिम्मेदारी दोनों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।