राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में धुंध की परत छाई हुई है। वीडियो इंडिया गेट और उसके आस-पास के इलाके से है। CPCB के दावे के मुताबिक, इलाके के आस-पास AQI 347 है, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया है। GNCTD के तहत सभी सरकारी ऑफिस और नेशनल कैपिटल टेरिटरी दिल्ली में चलने वाले सभी प्राइवेट ऑफिस, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के तहत 50% स्टाफ के साथ काम करेंगे और बाकी घर से काम करेंगे। GNCTD के तहत सरकारी ऑफिस के लिए- सभी प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष नियमित ऑफिस आएंगे, 50% से ज़्यादा स्टाफ ऑफिस में मौजूद नहीं होगा। बाकी स्टाफ घर से काम करेगा। NCT दिल्ली में काम करने वाले सभी प्राइवेट ऑफिस में 50% से ज़्यादा स्टाफ काम पर नहीं आएगा। बाकी स्टाफ को घर से काम करना होगा।
दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिरसा ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता जी की अगुवाई में, दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए है। 62 हॉटस्पॉट्स की पहचान कर, दिल्ली से लगने वाली दूसरे राज्यों की सीमा पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोका जा रहा है, निर्माण स्थलों की सख्त निगरानी हो रही है एवं उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पिछले कई दिनों से वायु प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है, जहाँ वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 'बहुत खराब' (Very Poor) या कई इलाकों में 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार, 301 से 400 के बीच का AQI 'बहुत खराब' माना जाता है, जो सांस की बीमारी वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, और 401 से 500 के बीच की श्रेणी 'गंभीर' होती है, जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है। वर्तमान में, कई क्षेत्रों में AQI 400 के पार या 450 के करीब तक दर्ज किया जा रहा है, जो हवा की बेहद खतरनाक स्थिति को दर्शाता है।
अगले 48 घंटों के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदूषण के स्तर में किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है और हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में ही बरकरार रहने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम के मुताबिक, ठंडी हवाओं और हवा की कम गति (4-5 किमी/घंटा) के कारण प्रदूषक कण (जैसे PM2.5 और PM10) निचले वातावरण में ही फंसे रहते हैं, जिससे स्मॉग (धुंध) की घनी परत छाई रहती है। PM2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित मानक से 20 गुना तक अधिक दर्ज किया गया है। प्रदूषण के मुख्य कारणों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, और उद्योगों का धुआँ शामिल है।
इस भारी संकट के मद्देनजर, सरकार और संबंधित प्राधिकरणों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त प्रतिबंध लागू किए हैं, जिनमें गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों पर रोक, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर प्रतिबंध (कुछ क्षेत्रों में), और कार्यालयों में वर्क-फ्रॉम-होम की सलाह शामिल है। यह अत्यंत खराब हवा की गुणवत्ता विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए जानलेवा जोखिम पैदा करती है। निवासियों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, खुले में व्यायाम न करें, और N95 मास्क का उपयोग करें। कुल मिलाकर, आने वाले दो दिन दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है।