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Datia By Election Result: दतिया उपचुनाव में हार के बादनरोत्तम मिश्रा के गढ़ में भाजपा का तगड़ा एक्शन!

Wed, 05 Aug 2026 12:41 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी संगठन ने बड़ा और सख्त संगठनात्मक कदम उठाते हुए दतिया जिले की पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कार्रवाई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर की गई है। उपचुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी के भीतर हार को लेकर लगातार मंथन चल रहा था और संगठन के अंदरूनी स्तर पर भीतरघात, कमजोर चुनाव प्रबंधन तथा कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी जैसे आरोप सामने आ रहे थे। इन्हीं शिकायतों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए भाजपा प्रदेश संगठन ने दो सदस्यीय समीक्षा समिति का गठन किया था। इस समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया था। समिति को चुनाव के दौरान संगठन की भूमिका, चुनाव प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व की कार्यशैली, प्रचार अभियान तथा अन्य संभावित कारणों की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। 

समिति ने विभिन्न स्तरों पर चर्चा करने, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने तथा चुनावी गतिविधियों का आकलन करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को सौंप दी। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया गया। पार्टी का मानना है कि संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और भविष्य के चुनावों के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपचुनाव के भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी तथा चुनाव अभियान से जुड़े कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक में उपचुनाव की हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई और संगठनात्मक कमियों के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर भी विचार-विमर्श हुआ।

हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद अधिकांश मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मीडिया से बातचीत से बचते नजर आए। किसी भी नेता ने बैठक में हुई चर्चा या लिए गए निर्णयों पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। भाजपा की इस कार्रवाई को पार्टी के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिला कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला केवल हार की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को पुनर्गठित कर आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा भी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि भाजपा दतिया में नए संगठन का गठन कब करती है और समीक्षा समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे कौन-कौन से संगठनात्मक बदलाव किए जाते हैं।

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