केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात के बाद प्रदर्शनकारी समूह के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के साथ हुई बातचीत को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सभी मांगों और चिंताओं को सरकार के सामने रख दिया है और अब आगे का फैसला सरकार को करना है। सौरव दास ने कहा कि उनकी मुख्य मांग युवाओं को न्याय दिलाने की है और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बातचीत के लिए बुलाए जाने को आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि लंबे समय के बाद पहली बार सरकार ने युवाओं के दबाव और विरोध को देखते हुए संवाद का रास्ता अपनाया है।
सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया है कि संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और जल्द ही जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बातचीत की पहल को वह आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देखते हैं। हालांकि, उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर की और आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस के माध्यम से सख्ती दिखाई गई, जिससे उनका भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार किया गया, उसे लेकर वे चिंतित हैं और सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि उनका कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है तथा उन्हें पद छोड़ना चाहिए। हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान और मांग है, जिस पर अंतिम फैसला सरकार और संबंधित नेतृत्व को लेना है। सौरव दास ने सवाल उठाया कि यदि बदलाव होना है तो वह कब होगा।
उन्होंने आगे कहा कि युवाओं की आवाज और लगातार हो रहे विरोध के कारण ही सरकार बातचीत के लिए आगे आई है। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के दौरान उठाए गए मुद्दों पर सकारात्मक कदम उठाएगी और युवाओं के हित में समाधान निकाला जाएगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले में आगे की दिशा सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी बातचीत पर निर्भर करेगी। प्रदर्शनकारी पक्ष का कहना है कि वे अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे और सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।