Bulandshahar Highway Rape Case: बुलंदशहर में नेशनल हाईवे-91 पर नौ साल पहले कार सवार परिवार को बंधक बनाकर मां-बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म और लूटपाट करने के पांच दोषियों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओपी वर्मा के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने कहा कि सभी दोषी अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे। साथ ही अर्थदंड की आधी राशि पीड़ित मां-बेटी को दी जाएगी।
बता दें कि, इस वारदात के नौ वर्ष चार माह और 25 दिन बाद फैसला आया है। वारदात 28 जुलाई 2016 की रात हुई थी। उस वक्त गाजियाबाद में रहने वाले परिवार के छह सदस्य शाहजहांपुर स्थित पैतृक गांव तेरहवीं में शामिल होने जा रहे थे। बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के निकट बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया था। उन्होंने कार सवार 14 वर्षीय किशोरी, उसकी मां, पिता, ताई, ताऊ व तहेरे भाई को बंधक बना लिया था। सभी को कार समेत सड़क के दूसरी तरफ खेत में ले गए। वहां तीनों पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए। किशोरी व उसकी मां के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद आरोपी लूटपाट कर भाग निकले थे।
बुलंदशहर की अदालत में पांच दरिंदों को सजा सुनाए जाने के बाद पीड़िता ने अपनी खामोशी तोड़ी। पीड़िता ने बताया कि एक काली रात ने उनकी हंसती-खेलती जिंदगी को उम्रभर का सन्नाटा दे दिया। आज भी कई रातें ऐसी होती हैं, जब वह घबराकर नींद से जाग जाती है। वह कहती हैं कि दरिंदों के चेहरे याददाश्त में पत्थर की लकीर की तरह दर्ज हैं। उन्होंने सिर्फ शरीर को नहीं नोचा, बल्कि भविष्य और खुशियां भी तबाह कर दीं। वे इंसान नहीं, राक्षस थे। उन्होंने बताया, वह चाहती हैं कि दोषियों को ऐसी सजा मिले, जिससे किसी और बेटी को उस रात का खौफ न झेलना पड़े।