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Bihar Election 2025:सीट शेयरिंग को लेकर NDA-महागठबंधन में फंसा पेंच, PK पर दोनों की नजर।

Mon, 08 Sep 2025 05:00 PM IST
अभिलाषा पाठक वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

बिहार चुनाव पर पूरे देश की नजर है, चुनाव आयोग के SIR को विपक्ष की तरफ से राहुल और तेजस्वी ने चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाया तो नीतीश कुमार  और मोदी के चेहरे पर NDA जीत के लिए आश्वस्त है। लेकिन दोनों दलों को अभी सबसे बड़ी परीक्षा पास करनी है...जी हां सीट शेयरिंग। सीट शेयरिंग को लेकर NDA और INDIA में से किसका पेंच ज्यादा फंसा हुआ है, ये आपको जानना चाहिए...पीके इस बार के चुनाव में एक थर्ड फैक्टर के रूप में अहम बने हुए हैं। क्या पीके का प्रभाव NDA और INDIA के सीट श्यरिंग फॉर्मूला पर पड़ेगा? NDA और INDIA के अंदर खाने से क्या खबरें हैं सीट शेयरिंग को लेकर आइए जानते हैं।

दरअसल  शीट शेयरिंग को लेकर भी रस्साकशी तेज हो गई है।एनडीए और महागठबंधन दोनों में सीटों के बंटवारे को लेकर बैठकें शुरू हो गई हैं। एनडीए गठबंधन में जहां चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की मांगों के कारण बातचीत चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वहीं, विपक्षी खेमे में दो और दल शामिल हो गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी अब महागठबंधन के घटक बन गए हैं।


इन्हें लेकर अब महागठबंधन में कुल आठ दल हो गए हैं। अब राज्य की 243 विधानसभा सीटों को लेकर 8 दलों में बंटवारा होगा, ऐसी स्थिति में अब सभी को खुश कर पाना मुश्किल है।राजद के साथ कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), भाकपा, माकपा और भाकपा-माले पहले से ही महागठबंधन में थे। अब महागठबंधन में भी सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसना तय है।पहले से ही कांग्रेस और भाकपा-माले ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। झामुमो के साथ रालोजपा को राजद अपने हिस्से से सम्मानजनक सीटें देगा। तेजस्वी को राहुल को खुश करना भी बहुत बड़ी चुनौती होगी। शनिवार को तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावारू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के साथ वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी की उपस्थिति रही।
चर्चा यह भी है झामुमो को चकाई, कटोरिया सहित चार से छह सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, उसकी दावेदारी 12 सीटों की है। अलौली सहित रालोजपा को दो-तीन सीटें मिलेंगी। वह आधा दर्जन की अपेक्षा पाले हुए है।वहीं, वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश सहनी बार-बार यह बयान दे रहे हैं कि बिहार में महागठबंधन में सबकुछ सही चल रहा है।सीट शेयरिंग को लेकर सहनी ने कहा कि सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं है और पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। वहीं, मुकेश सहनी जहां यह भी कह रहे हैं कि पार्टी जल्द ही उपमुख्यमंत्री के नामों का भी एलान करेगा।


वहीं बात करें एनडीए गठबंधन की तो वहां भी इस बार सीट शेयरिंग पर पेंच फंसना तय माना जा रहा है। चिराग की बगावत और बार-बार मांझी का चिराग पर हमला काफी कुछ संकेत कर रहा है।चिराग की पार्टी इस बार चुनावों में 40 से अधिक सीटों पर दावेदारी को लेकर अड़ी हुई है, वहीं मांझी को भी इस बार चुनाव में कम से कम 20 सीटों के लिए दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। सियासी जानकारों की मानें तो इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर महागठबंधन और एनडीए दोनों में फेंच फंसने की संभावना प्रबल है। वहीं, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर किस ओर अपना पाल मोड़ते हैं, इस पर भी सबकी नजर है। वहीं, राजद से निष्कासित तेज प्रताप यादव भी मैदान में हुंकार भर रहे हैं। अगर आखिर तक उन्हें भी मनाया नहीं गया तो वह भी महागठबंधन को चोट पहुंचा सकते हैं।

 

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