क्या जंतर-मंतर पर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म करने की कोशिश हो रही है? क्या भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं? और आखिर क्यों उनके स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं? इन सभी सवालों के बीच आंदोलन अब सिर्फ छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी पकड़ता जा रहा है।
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन अब 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने बड़ा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की और उनकी ओर कोई वस्तु फेंकी गई। हालांकि, इस घटना में उन्हें कोई चोट नहीं आई।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें पहले ही पुलिस के एक अंदरूनी सूत्र से जानकारी मिली थी कि प्रदर्शन को बाधित करने के लिए कुछ लोगों को भेजा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सोनम वांगचुक को किसी तरह का नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। दीपके का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म करने की स्पष्ट कोशिश की जा रही है। फिलहाल, इन आरोपों पर सरकार या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उधर, सबसे बड़ी चिंता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर है। मेडिकल टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की वजह से उनका वजन लगातार घट रहा है। सीजेपी के अनुसार, अब तक उनका करीब नौ किलोग्राम वजन कम हो चुका है।
डॉ. सतीश लांबा ने बताया कि शुक्रवार को सोनम वांगचुक का वजन 56.55 किलोग्राम दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम और कम हुआ है। उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज की गई। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में हल्का डिहाइड्रेशन है। पहले शरीर की चर्बी कम हुई, फिर मांसपेशियां प्रभावित होने लगीं और यदि अनशन लंबा चला तो अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
इस बीच सोनम वांगचुक के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, राजेंद्र पाल, एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला जंतर-मंतर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना समर्थन जताया।
पवन खेड़ा ने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज़ को लोकतंत्र में सुना जाना चाहिए और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सुप्रिया सुले ने कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए। वहीं दुष्यंत चौटाला ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और अनियमितताओं को लाखों युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की।
एक ओर भूख हड़ताल लंबी होती जा रही है, दूसरी ओर स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं और अब हमले के आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता चुनती है या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।