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Mahua Moitra Office Attack: काले झंडे दिखाए-फेंके अंडे, भयंकर विरोध पर वीडियो में भड़कीं महुआ। TMC

Wed, 01 Jul 2026 06:59 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर टकराव देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को नदिया जिले के पलाशी में भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले और कार्यालय के बाहर अंडे फेंके, जबकि महुआ मोइत्रा ने पुलिस पर मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया। दूसरी ओर भाजपा ने घटना से दूरी बनाते हुए कहा कि अंडे फेंकना पार्टी की संस्कृति नहीं है।

पश्चिम बंगाल में सियासी तनाव एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को बुधवार को नदिया जिले के पलाशी में भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। महुआ मोइत्रा 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित एक बैठक में शामिल होने पहुंची थीं, तभी रेस्तरां के बाहर भाजपा समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने महुआ मोइत्रा पर अंडे फेंके। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और मौके पर मौजूद पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर घटना का वीडियो साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके कृष्णानगर स्थित कार्यालय पर भी अंडे और सब्जियां फेंकी। उन्होंने कहा कि पुलिस और सीआरपीएफ के जवान सब कुछ देखते रहे, लेकिन किसी ने भी हस्तक्षेप नहीं किया।

वीडियो संदेश में महुआ मोइत्रा ने कहा कि वह पिछले एक घंटे से घटनास्थल पर मौजूद हैं और उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में हैं, अपने कार्यालय में हैं और किसी भी दबाव में वहां से नहीं जाएंगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के चेहरे कैमरे में रिकॉर्ड करने की भी अपील की और आरोप लगाया कि बाद में इस पूरे घटनाक्रम को नकारने की कोशिश की जाएगी।

घटना के बाद भाजपा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि अंडे फेंकना भाजपा की कार्यशैली या संस्कृति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की अपील की, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचे। हालांकि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन हिंसक या अपमानजनक तरीकों से असहमति जताने को उचित नहीं बताया।

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंडे फेंकने जैसी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि किसी भी व्यक्ति पर अंडे फेंकने की घटना में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराई जाए, चाहे पीड़ित कोई आरोपी हो या राजनीतिक विरोधी। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अब महुआ मोइत्रा पर हुए कथित हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर टीएमसी कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इस घटना से खुद को अलग बताते हुए अनुशासित विरोध की बात कर रही है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है।

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