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Atishi Video Case:डॉक्टर्ड निकला आतिशी का वीडियो,जालंधर कोर्ट ने दिया वीडियो हटाने का आदेश

Fri, 16 Jan 2026 06:45 AM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

आम आदमी पार्टी (AAP) की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के कथित विवादित वीडियो मामले में जालंधर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने माना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो "छेड़छाड़" (doctored) करके बनाया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है। इस फैसले को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इस वीडियो को कई भाजपा नेताओं ने साझा किया था।


जालंधर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स—मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम), एक्स (पूर्व में ट्विटर), और टेलीग्राम—को निर्देश दिया कि वे आतिशी के इस फर्जी वीडियो को 24 घंटे के भीतर हटा दें।

अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि भविष्य में इस वीडियो के किसी भी वर्जन (mirror or derivative versions) को अपलोड होने से रोका जाए।

कोर्ट का यह फैसला पुलिस द्वारा पेश की गई फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि वायरल वीडियो के ऑडियो और वीडियो में तकनीकी छेड़छाड़ की गई थी।


विवाद की जड़ दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही का एक वीडियो क्लिप था।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया था कि आतिशी ने सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आया कि आतिशी ने अपने मूल भाषण में "गुरु" शब्द का इस्तेमाल ही नहीं किया था। रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में अलग से ऑडियो जोड़ा गया और भ्रामक सबटाइटल (captions) लगाए गए ताकि उनके बयान का अर्थ बदला जा सके और धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा सके।



 दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से शेयर किया था और आतिशी पर सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था।

कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। AAP नेता अमन अरोड़ा और अनुराग ढांडा ने कहा कि भाजपा का "झूठ और प्रोपेगेंडा" बेनकाब हो गया है। उन्होंने इसे भाजपा की "फर्जी वीडियो वाली राजनीति" बताया है। कोर्ट द्वारा वीडियो को फेक करार देने से भाजपा के उन आरोपों की हवा निकल गई है जो वे आतिशी के खिलाफ लगा रहे थे।


इस मामले में जालंधर पुलिस ने इकबाल सिंह बग्गा की शिकायत पर FIR दर्ज की थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) (धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने जांच में पाया कि वीडियो का उद्देश्य पंजाब में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना था।


इस मामले में एक और पेच फंसा हुआ है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उनका कहना है कि विधानसभा के अंदर का वीडियो "सदन की संपत्ति" (Property of the House) है और बिना अनुमति के पुलिस द्वारा इस पर FIR दर्ज करना विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का मामला बनता है।


जालंधर कोर्ट का यह आदेश न केवल आतिशी के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह फेक न्यूज और डीपफेक वीडियो के जरिए चुनावों या राजनीति को प्रभावित करने की कोशिशों पर भी एक सख्त प्रहार है। अब देखना होगा कि सोशल मीडिया कंपनियां इस आदेश का पालन कितनी जल्दी करती हैं और भाजपा इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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