फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amit Shah on Naxalism: देश अब नक्सलवाद से मुक्त,नारायणपुर में खुले स्कूल पटरी पर लौटा जीवन!

Tue, 31 Mar 2026 03:45 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा, “हमारे पास बेहतर स्कूल हैं, सड़क संपर्क बेहतर है हमने 10 स्कूल फिर से खोल दिए हैं और 24 नए स्कूल भी खोले हैं जिनमें 700 से अधिक छात्रों का प्रवेश हुआ है संपर्क व्यवस्था को भी विकसित किया जा रहा है, राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हो रहा है, जो महाराष्ट्र से जुड़ेगा हम मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी काम कर रहे हैं। हमने 1 जनवरी से सुशासन एक्सप्रेस शुरू की है, जिसमें वाई-फाई और इन्वर्टर लगा हुआ है। आधार ऑपरेटर और डाकघर के लोग 2-3 दिनों के लिए गांव जाकर अपने दस्तावेज तैयार करने के लिए इसी एक्सप्रेस से यात्रा करते हैं

ग्रामीण प्रदीप ने कहा, “यहाँ स्कूल नक्सल जनताना सरकार द्वारा चलाए जाते थे उनके बाद, स्कूल 12 गाँवों द्वारा गठित एक समिति द्वारा चलाया जाने लगा पुलिस शिविरों के बाद सड़कों और स्कूलों का निर्माण शुरू हुआ, और फिर बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने चले गए अब, नक्सली यहाँ नहीं आते विकास शुरू हो गया है, इसमें कुछ समय लगेगा।

नक्सलवाद से लंबे समय तक प्रभावित रहे इलाकों में अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं, और इसी क्रम में नारायणपुर से एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है, जहां वर्षों बाद सामान्य जीवन पटरी पर लौटता दिख रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों के कारण भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे स्थानीय लोगों के जीवन में अब स्थिरता और विश्वास वापस आ रहा है। इसका सबसे बड़ा संकेत यहां स्कूलों का फिर से खुलना है, जो न केवल शिक्षा व्यवस्था के पुनर्जीवन का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी अहम निशानी है। जिन इलाकों में पहले बच्चों का स्कूल जाना भी जोखिम भरा होता था, वहां अब बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं और अभिभावक भी निश्चिंत होकर उन्हें शिक्षा के लिए भेज रहे हैं।

सरकार और सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति के चलते क्षेत्र में शांति स्थापित करने में सफलता मिली है। सड़कों, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ प्रशासन ने स्थानीय लोगों के साथ संवाद बढ़ाया, जिससे उनका भरोसा जीतने में मदद मिली। अब गांवों में बाजार लगने लगे हैं, लोग अपने रोजमर्रा के कामकाज में सक्रिय हो गए हैं और आर्थिक गतिविधियां भी धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। पहले जहां डर के कारण शाम होते ही सन्नाटा छा जाता था, वहीं अब सामान्य जनजीवन की चहल-पहल देखने को मिल रही है।

स्कूलों के खुलने से बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है और शिक्षकों की नियुक्ति तथा उपस्थिति भी बेहतर हुई है। सरकार का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो इन क्षेत्रों को स्थायी रूप से विकास की राह पर ले जा सकता है। हालांकि चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन हालात में आया यह बदलाव निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शांति और विकास की इस प्रक्रिया को लगातार जारी रखा जाएगा, ताकि क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित और समृद्ध बन सके।
 

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें