INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शाह ने कहा कि सुदर्शन रेड्डी के फैसलों ने देश में नक्सलवाद को खत्म होने के बजाय और मजबूत किया। गृह मंत्री ने कहा, “उन्होंने सलवा जुडूम को खत्म किया, जिससे जनजातियों से आत्मरक्षा का अधिकार छिन गया। उस समय नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें ले रहा था। लेकिन इस फैसले ने इसे और दो दशक तक खींच दिया।” शाह ने दावा किया कि जब नक्सलियों ने स्कूलों को तबाह कर दिया था, तब सुरक्षा बल उन स्कूलों में डेरा डालते थे। “रेड्डी ने आदेश जारी कर रातों-रात सुरक्षा बलों को स्कूलों से बाहर कर दिया। इसके बाद कई जगहों पर हमारे जवानों पर हमले हुए।” गृह मंत्री ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे इन दो फैसलों पर जवाब दें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मुझे लगता है, लेफ्ट विचारधारा ही सुदर्शन रेड्डी को चुनने की कसौटी रही होगी।” शाह के इन बयानों के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी इसे नक्सलवाद पर कांग्रेस और INDIA गठबंधन की “कमजोर नीति” का उदाहरण बता रही है, जबकि विपक्ष ने अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जब उनसे पूछा गया कि एनडीए ने तमिलनाडु के नेता और आरएसएस स्वयंसेवक रहे सीपी राधाकृष्णन को क्यों चुना, तो शाह ने इन अटकलों को खारिज किया कि यह फैसला 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में राजनीतिक लाभ लेने के मकसद से किया गया। शाह ने कहा, हम पहले भी तमिलनाडु में अपने सहयोगियों के साथ चुनाव लड़ चुके हैं और सीटें भी जीती हैं। अगर हम किसी को भी कहीं से नामित करते, तब भी ऐसे सवाल उठते। राधाकृष्णन का लंबा राजनीतिक जीवन रहा है। वह दो बार सांसद रहे हैं। वह पार्टी के तमिलनाडु अध्यक्ष रहे। वह झारखंड, तेलंगाना, पुडुचेरी और महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में साफ-सुथरी छवि बनाए रखी है। वह एक परिपक्व राजनेता हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या राधाकृष्णन का चयन उनके आरएसएस से जुड़े होने के कारण किया गया, तो शाह ने कहा कि आरएसएस से जुड़ाव कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भी संघ से जुड़े हैं। मैं भी जुड़ा हूं। क्या लोगों ने हमें इसलिए नहीं चुना कि हमारा संघ से संबंध है? क्या यह कोई माइनस प्वाइंट है? नहीं। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी संघ से जुड़े थे। राधाकृष्णन का भी यही संबंध है।