ईरान और इस्राइल के बीच शुरू हुई जंग अब बढ़ती ही जा रही है अब इस जंग के और भीषण होने के आसार हैं क्योंकि इस जंग में अमेरिका भी कूद गया है। अमेरिका ने रविवार को ईरान पर हमला किया और ईरान के तीन परमाणु स्थलों को निशाना बनाया। इसकी पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी समयानुसार रात 10 बजे राष्ट्र को संबोधित किया है।
ईरान-इस्राइल संघर्ष के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों पर रक्षा विशेषज्ञ संजय कुलकर्णी कहते हैं, "हमें उम्मीद है कि अब ईरान में कुछ अच्छे विचारक होंगे जो युद्ध को आगे नहीं बढ़ाना चाहेंगे। अगर युद्ध बढ़ता है तो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। हम उम्मीद कर सकते हैं कि इसे युद्ध का अंत माना जाए, न कि नई शुरुआत। अगर यह नई शुरुआत है तो पूरी दुनिया मुश्किल में पड़ जाएगी। अगर यह अंत है तो हमें उम्मीद है कि आज से शांति स्थापित होगी।"
ईरान में तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला करके इस्राइल-ईरान संघर्ष में शामिल होने के बाद, रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल बख्शी ने रविवार को इस बात पर जोर दिया कि भारत चल रहे संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का लाभ उठा सकते हैं और शांतिपूर्ण समाधान के लिए दबाव बना सकते हैं। बख्शी ने कहा, "भारत के लिए, यह अधिक सतर्क रहने का समय है। ईरान और इजरायल दोनों हमारे मित्र हैं। इजरायल के साथ हमारा भावनात्मक संबंध है... मुझे लगता है कि पीएम मोदी जैसी शख्सियत इस युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के साथ इस मुद्दे को उठाएगी।" बख्शी ने यह भी बताया कि फोर्डो, नतांज और एस्फाहान परमाणु सुविधाओं पर हमलों ने ईरान को संकेत दिया है कि अमेरिका "अब गंभीर है", इसकी तुलना एक शिकारी से की जो अपने शिकार का पीछा करता है चाहे कुछ भी हो, और सुझाव दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसी तरह की हरकतें करते रहेंगे