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Akhilesh Prasad Singh News: कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह का पार्टी की आंतरिक रणनीति पर फूटा गुस्सा

Wed, 24 Jun 2026 03:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

कांग्रेस सांसद Akhilesh Prasad Singh ने मंगलवार को बिहार में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति को लेकर खुलकर असंतोष जताया। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के लिए पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व संबंधी निर्णयों पर सवाल उठाए। अखिलेश प्रसाद सिंह का कहना था कि जब तक वे बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर थे, संगठन की स्थिति बेहतर थी, लेकिन उन्हें पद से हटाए जाने के बाद पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया। उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें अध्यक्ष पद से नहीं हटाया गया होता तो कांग्रेस का चुनावी परिणाम कहीं अधिक बेहतर होता और पार्टी केवल पांच-छह सीटों तक सीमित नहीं रहती।

अखिलेश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि उनके हटाए जाने के पीछे पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका थी। उन्होंने कहा कि जब Shahnawaz Alam अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में सचिव बने, तो सबसे पहला कदम उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाने का उठाया गया। उनके अनुसार, इसके बाद जो चुनावी नतीजे सामने आए, वे स्वयं इस निर्णय की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की सामाजिक, राजनीतिक और जातीय परिस्थितियों की उन्हें गहरी समझ है और वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं।

अपने बयान में उन्होंने खुद को “सियासी अखाड़े का आदमी” बताते हुए कहा कि उन्हें बिहार ही नहीं, बल्कि Uttar Pradesh सहित कई राज्यों की राजनीति की अच्छी समझ है। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता Salman Khurshid का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उन्हें अच्छी तरह जानते हैं और उनके राजनीतिक अनुभव से परिचित हैं। अखिलेश प्रसाद सिंह ने यह भी कहा कि पार्टी में कई बार ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं, जिनका जमीनी राजनीति से सीधा संबंध नहीं होता। उनके अनुसार, बिहार जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में प्रभारी या रणनीतिक जिम्मेदारियां उन नेताओं को मिलनी चाहिए, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों और संगठन की वास्तविक स्थिति की समझ हो।

कांग्रेस सांसद ने पार्टी की अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व संबंधी रणनीति पर भी सवाल उठाए। उनका संकेत था कि संगठनात्मक निर्णय लेते समय सामाजिक और राजनीतिक संतुलन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनके बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक असहमति और संगठनात्मक चुनौतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान बिहार में कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नेतृत्व को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकते हैं। फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से उनके आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके बयान ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

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