महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त नया विवाद खड़ा हो गया जब एनसीपी नेता रोहित पवार ने अजित पवार से जुड़े एक कथित विमान हादसे को लेकर साजिश की आशंका जताई। रोहित पवार के इस बयान के बाद सियासी हलकों में हड़कंप मच गया और विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेताओं की भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने रोहित पवार के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। अठावले ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के इस तरह की साजिश की बात करना ठीक नहीं है और इससे अनावश्यक भ्रम फैलता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अजित पवार एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और किसी भी तरह के हादसे को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। अठावले का कहना था कि अगर किसी को किसी साजिश की आशंका है तो उसे बयानबाजी करने के बजाय संबंधित जांच एजेंसियों के पास जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह के आरोप न सिर्फ एक व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों पर भी सवाल खड़े करते हैं। रोहित पवार के बयान को लेकर अठावले ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही अस्थिरता और आपसी आरोप-प्रत्यारोप से गुजर रही है और ऐसे बयान हालात को और बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने अपील की कि सभी राजनीतिक दल और नेता संयम बरतें और गंभीर मुद्दों पर जिम्मेदारी से बोलें। वहीं, रोहित पवार के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल अपनी आशंका जाहिर की है और उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं था, बल्कि सच्चाई सामने लाने की मांग करना था।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में आंतरिक खींचतान कितनी गहरी हो चुकी है, जहां हर बयान को सत्ता संघर्ष के नजरिए से देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार और शरद पवार गुट के बीच चल रही तनातनी के चलते ऐसे बयान लगातार सामने आ रहे हैं। अठावले की प्रतिक्रिया को सत्तापक्ष की ओर से स्थिति को संभालने और मामले को तूल न देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल, यह मुद्दा सियासी बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन आने वाले दिनों में यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में और गर्माहट ला सकता है।