एयर इंडिया अहमदाबाद क्रैश को लेकर यात्रियों के परिजनों का केस लड़ रहे वकील ने दुर्घटना को लेकर सामने आई किस थ्योरी को सही नहीं माना है? उन्होंने हादसे के पीछे किस परेशानी की सबसे ज्यादा आशंका जताई है? वकील ने जो दावे किए हैं, उन्हें तर्कों की कसौटी पर कैसे रखा है? आइये जानते हैं...इस साल जून में जब गुजरात के अहमदाबाद से ब्रिटेन के लंदन रवाना हुआ एयर इंडिया का विमान उड़ान भरने के कुछ सेकंड्स बाद ही क्रैश हो गया तो हादसे के पीछे कई तरह की बातें शुरू हो गईं। इसमें बोइंग कंपनी के विमानों के खराब रिकॉर्ड्स से लेकर एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया और पायलटों तक को लेकर कई ऐसी चर्चाएं हुईं, जिन्हें लेकर पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। इसके ऊपर भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने दुर्घटना के कारणों को लेकर और ज्यादा भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। अब एयर इंडिया क्रैश में अपने करीबियों को गंवाने वाले परिवारों की तरफ से केस लड़ रहे वकील ने घटना की वजहों को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जिससे दुर्घटना के कारणों से जुड़ा एक नया कोण सामने आया है।क्या हैं दुर्घटना का शिकार हुए यात्रियों के वकील के दावे?
1. हादसे पर सामने आई किस थ्योरी को नकारा?
विमान निर्माता कंपनी बोइंग के खिलाफ केस में मृत यात्रियों के परिजन के केस को देख रहे माइक एंड्रयूज ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कथित तौर पर यात्री विमान के पायलटों पर ईंधन नियंत्रण को जानबूझकर या गलती से बंद करने की बात कही गई। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया संस्थान 'द इंडिपेंडेंट' को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह दावे की पायलटों ने कोई गलती की या जानबूझकर विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराया, इसका न तो सबूत समर्थन करते हैं और न ही यह मृतकों के साथ न्याय है। एंड्रयूज के मुताबिक, बोइंग का विमान पहले से ही कुछ अन्य समस्याओं से जूझ रहा था। खासकर अपने पानी स्टोरेज की प्रणाली को लेकर। इस प्रणाली से बोइंग अपने यात्रियों और क्रू के सदस्यों के लिए सुरक्षित और पीने योग्य पानी मुहैया कराने का दावा करता है, हालांकि, एंड्रयूज ने बताया कि यह सिस्टम विमान के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक्स के काफी करीब है। उन्होंने कहा कि बीते काफी समय से बोइंग के बुलेटिन और अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) ने चेतावनियां जारी कीं, जिसमें पानी की लीकेज को लेकर आगाह किया गया था। माइक एंड्रयूज के मुताबिक, विमान में पानी की लाइनों को जोड़ने वाली कपलिंग उन्होंने खुद खरीदी हैं और यह सरल से उपकरण हैं, जो कि दो लाइनों को थामे रहते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कपलिंग का एक हिस्सा ढीला पड़ सकता है। इससे कुछ समय बाद ही पानी की लीकेज शुरू हो सकती है। एफएए के मुताबिक, अगर विमान का फैडेक गड़बड़ हो जाए तो इंजन बेकार हो जाता है। इसी आधार पर एंड्रयूज ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि पानी का लीकेज उपकरणों को खराब कर दे तो स्थिति तुरंत खतरनाक हो जाएगी।
हालांकि, इस स्थिति में अगर पानी उपकरणों को थोड़े समय के लिए बंद या दोबारा चालू करने लायक स्थिति में ले आए तो इससे इंजन कुछ समय के लिए अपने आप बंद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अहमदाबाद में हमने देखा कि विमान के दोनों इंजन एक साथ बंद हो गए या उसने कुछ ही सेकंड्स के अंतराल में उड़ान भरने की ताकत खो दी। यह अपने आप में अनोखी बात है। ऐसे में पानी का उन उपकरणों तक पहुंचना और सिस्टम का खराब हो जाना इसकी वजह हो सकती है। उन्होंने कहा कि एफएए ने खुद क्रैश से कुछ हफ्ते पहले इस जोखिम को सामने रखा था। अहमदाबाद में एयर इंडिया द्वारा संचालित बोइंग 737-8 ड्रीमलाइनर विमान के क्रैश में सभी 229 यात्रियों और 12 क्रू सदस्यों की जान चली गई थी। इसके अलावा विमान की चपेट में आकर 19 अन्य की मौत हुई थी।