AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा शर्टलेस विरोध प्रदर्शन किए जाने के मामले ने राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया, जिसमें इंडियन यूथ कांग्रेस के महासचिव निगम भंडारी भी शामिल थे और उन पर प्रदर्शन के लिए पुलिस ने आपराधिक कार्रवाई शुरू की थी; इस प्रकरण में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी अग्रिम (इंतज़ारपूर्व) जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम जमानत (interim bail) मंज़ूर की है, जिसके तहत कोर्ट ने भंडारी को मार्च 24, 2026 तक जमानत दी है, बशर्ते कि वे जांच में सहयोग करें, जांच अधिकारी के समक्ष समय-समय पर उपस्थित हों, देश से बाहर न जाएँ, किसी प्रकार के सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें और संबंधित पक्ष से संपर्क न स्थापित करें;
कोर्ट ने यह आदेश सुनाया है जिससे उन्हें हिरासत से कुछ राहत मिली है और वे अपने खिलाफ दर्ज मामले में आगे की प्रक्रिया के लिए कोर्ट-जाँच में भाग ले सकेंगे। इस विवाद की शुरूआत 20 फरवरी 2026 को हुई जब कुछ यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने समिट के अंदर अपने शर्ट उतारकर पीएम नरेंद्र मोदी और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के चित्रों वाली टी-शर्टें दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में खलबली मची और पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, साथ ही दिल्ली पुलिस का आरोप रहा कि प्रदर्शन “अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश” थी और यह एक योजनाबद्ध घटना थी; पुलिस ने सुरक्षा उल्लंघन, सार्वजनिक व्यवस्था भंग और संबंधित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएँ दायर हुईं जिनमें से भंडारी की याचिका पर कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रखने के बाद आखिरकार अंतरिम जमानत प्रदान की, जिससे वे न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं लेकिन जांच का सामना भी करना है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है, जहाँ विरोधी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया है और सरकार समर्थक पक्ष इसे “देश की प्रतिष्ठा के खिलाफ” कृत्य करार देता है। इस घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच और पुलिस-सरकार की कार्यवाही को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनी हुई है, जबकि मामले की जांच और आगामी सुनवाई कोर्ट में जारी है।