तिरुपति लड्डू विवाद याद है आपको, तिरुपति मंदिर के वो लड्डू... जिनकी पवित्रता पर करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था टिकी है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से ये लड्डू आस्था नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी 'पॉलिटिकल वॉर' का केंद्र बने हुए हैं। क्या वाकई प्रसाद में 'चर्बी' मिली थी? या फिर ये सिर्फ सत्ता की कुर्सी के लिए बुना गया एक सनसनीखेज जाल था?" अब CBI की फाइनल चार्जशीट आने के बाद आंध्र प्रदेश सहित पूरे देश में राजनीतिक घमासान तेज है। SIT ने जो निष्कर्ष निकाले हैं, उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी-अपनी व्याख्या करने का मौका दे दिया है। क्या कहा है अब मामलें ने क्या मोड लिया चलिए बताते है। तिरुपति लड्डू विवाद पर सीबीआई की फाइनल चार्जशीट आ गई है। नेल्लोर की अदालत में दाखिल 223 पन्नों के इस दस्तावेज़ ने एक तरफ भ्रष्टाचार की पोल खोली है, तो दूसरी तरफ 'पशु चर्बी' के दावों पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। अंतिम चार्जशीट के बाद एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। ऐसे में सियासी बायनबाजी भी तेज हो गई। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के लड्डू को लेकर ऐसा दावा किया था, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। उन्होंने प्रसाद के लड्डू को 'पशु चर्बी' से अपवित्र किए जाने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। विजयवाड़ा में मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रवक्ता सादिनेनी यामिनी ने कहा कि SC की ओर से नियुक्त CBI के नेतृत्व वाली SIT ने तिरुपति लड्डू मामलें में अपनी फाइनल चार्जशीट जमा कर दी है, जिसमें घी में मिलावट और लड्डू बनाने के लिए 36 लोगों को नामजद किया है।