कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में स्थित समूर डैम न सिर्फ किसानों के लिए सिंचाई की एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है, बल्कि यह अब क्षेत्र का नया 'सेल्फी प्वाइंट' भी बन गया है। मगर इसके पीछे की कहानी सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों की नहीं, बल्कि वर्षों से अधूरे पड़े एक सपने की भी है,एक ऐसा सपना जिसमें क्षेत्र के किसानों की पांच हजार कनाल भूमि को सिंचित करने की आकांक्षा छुपी हुई है। और इस गाथा को लिखने वाले कोई और नहीं बल्कि कुटलैहड़ विस क्षेत्र से चार बार जीते ओर एक बार सीपीएस और एक बार पांच विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे वीरेंद्र कंवर हैं। जिन्होंने 18 वर्ष पूर्व कुटलैहड़ विस क्षेत्र की जनता को पीने के पानी के साथ साथ खेतों की सिंचाई के लिए एक सपना दिखाया था। आज वह सपना किसानों का पूरा भी हो रहा है। लेकिन अभी भी अधूरे डैम से पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर हताश और निराश दिखाई दे रहे है। राष्ट्रीय बॉलीबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि समूर डैम परियोजना की नींव 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी। उस समय नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) से ₹20 करोड़ की राशि स्वीकृत करवाई गई थी। इस डैम से साथ लगते गांवों की पांच हजार कनाल भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिक उद्देश्य था। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि हमने पांच वर्षों में युद्ध स्तर पर कार्य प्रारंभ किया और डैम निर्माण की दिशा में काफी प्रगति भी हुई।