शहीद भगत सिंह क्लब गगरेट के सदस्यों द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घनारी में स्थापित शहीद स्मारक पर काकोरी कांड के अमर क्रांतिकारियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह के 98वें बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।इस अवसर पर क्लब के प्रधान मुनीष ठाकुर ने क्रांतिकारियों की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये वीर सपूत देश का गौरव हैं, जिनका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का पुनीत कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इन महान क्रांतिकारियों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।प्रधान मुनीष ठाकुर ने बताया कि काकोरी कांड के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से जुड़े इन तीन महानायकों को दोषी ठहराते हुए आज ही के दिन वर्ष 1927 में फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। उन्होंने कहा कि अशफाक उल्ला खान और पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती हिंदू–मुस्लिम एकता की अद्भुत मिसाल है, जो आज के समय में समाज के लिए एक बड़ा संदेश देती है। जब अंग्रेज ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपना रहे थे, तब अलग-अलग धर्मों से संबंध रखने वाले इन क्रांतिकारियों ने एक साथ भोजन कर देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। उन्होंने आगे बताया कि 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शाहजहांपुर के इन तीनों क्रांतिकारियों- अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कांड के बाद अंग्रेजों ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 19 दिसंबर 1927 को अलग-अलग जिलों में फांसी दे दी।इस मौके पर क्लब के उपप्रधान राजिंदर बंसल, अमृतपाल सिंह, जनक शर्मा, रमन, मंजीत सिंह, विशाल, रघुनंदन, हनी, अरमान, शम्मी सिंह सहित अन्य सदस्यों ने शहीदों की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए तथा उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा।