उपमंडल बंगाणा की गोबिंद सागर झील के विभिन्न घाटों पर गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अवसर था सावन मास के पुण्यकारी दिन बेड़ा पूजन का। लठियाणी, मंदली, बुधान, अंदरौली (गरीबनाथ मंदिर), दोबड़ और धबेड़ा घाट पर श्रद्धालुओं ने बेड़े छोड़े और वैतरणी पार करने की प्रतीकात्मक परंपरा का पालन किया। सावन माह में जहां शिव भक्ति चरम पर होती है, वहीं यह माह परलोक के कल्याण हेतु भी महत्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी को पार करना मृत्यु के उपरांत मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक माना गया है। इसी उद्देश्य से लोग ‘बेड़ा पूजन’ कर झील में प्रतीकात्मक रूप से बेड़ा छोड़ते हैं। बेड़ा चालक पवन कुमार के अनुसार, श्रद्धालुओं को पूजन करते समय संपूर्ण श्रद्धा रखनी चाहिए। पूजन में नाव को आभूषणों से सजाया जाता है और दलिया, हलवा, पूरी, खीर आदि का भोग अर्पित कर बेड़ा छोड़ा जाता है। धबेड़ा घाट पर बाबा पहाड़िया मंदिर कमेटी की ओर से हर गुरुवार को निशुल्क भंडारा आयोजित किया जाता है। पंचायत प्रधान कमलेश कुमारी ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आग्रह किया कि सफाई का विशेष ध्यान रखें और झील में नहाने से परहेज करें। इस मौके पर जसवंत सिंह, सरवन सिंह, रवि कुमार, कमलेश कुमारी, माया देवी, बीरबल, जय राम, कृष्ण कुमार, अजय कालिया, संजीव कुमार, बाबा हरी राम सहित दर्जनों लोग सेवा कार्यों में जुटे रहे।