किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति ने इंजिनीयर बलवीर चौधरी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को जिलाधीश के माध्यम से सौंपा ज्ञापन। बलवीर चौधरी ने कहा कि किसानों को परेशान किया जा रहा है। घर से बेघर बंदोबस्त विभाग जमीन खरीदने वालों का रकवा कम कर रहा है। जबकि मौका पर पूरा है। कहा कि मुजारा एक्ट के तहत राजस्व विभाग गैरमरुसियों को मालिकाना अधिकार नहीं दे रहा है। महाल लालसिंगी में 85 % गरीब किसान रहते हैं। महाल लालसिंगी में अभी भी वन्दोवस्त चल रहा है। वित्तायुक्त एवं सचिव (राजस्व) हिमाचल प्रदेश सरकार ने भूव्यवस्था अधिकारी कांगड़ा स्थित धर्मशाला को 13 - 5-2008 को निर्देश दिए कि महाल लालसिंगी में यहां साविक लठ्ठा वुरी तरह से क्षतिग्रस्त होकर टुकड़ों मे विभक्त हो चुका है व विल्कुल भी पढ़ने योग्य नहीं है तथा अस्ल शजरा (मुसावी) व मोमी भी जिला व तहसील कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। अतः भूव्यवस्था कार्य जमावन्दी में दर्ज मलकीयत एवं खाना काशत के रकवा को आधार मानकर पैमाईयश मौका से मिलान करके भूस्वामी का रकवा पूरा किया जाए। दुर्भाग्यवश भूव्यवस्था कार्य में जुटे कर्मचारियों और अधिकारियों ने जमावन्दी में दर्ज मलकीयत एवं खाना काशत के रकवा को आधार मानकर पैमाइश मौका से मिलान करके भूस्वामी का रकवा पूरा नहीं किया। परिणामस्वरूप जिस जमींदार ने 1967 में 15 कनाल 14 मरले जमीन खरीदी , 15 - 3-1969 को इसका इंतकाल हो गया तथा 15 कनाल 14 मरले पर आज भी उसी जमींदार का कब्जा है।लेकिन उस जमींदार को रैविन्यू पेपर में 15 कनाल 14 मरले के स्थान पर मात्र 5 कनाल 8 मरले जमीन दी गई है।ज्ञात रहे उपरोक्त गांव में इस प्रकार की 118 रजिस्टरी हुई थीं लेकिन इनमें से अधिकांश का रकवा पूरा नहीं किया गया अर्थात सवंधित लोग घर से वेघर हो रहे हैं।यही नहीं महाल लालसिंगी का लठ्ठा क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्ष 1979 - 80 में भू इकत्रीकरण विभाग द्वारा वित्तायुक्त हिमाचल प्रदेश के दिशानिर्देश से महाल लालसिंगी का वन्दोवस्त विभाग से पटवारी प्रतिनियुक्ति करके शजरा तैयार किया गया और वर्ष 1980 से 1984 तक शजरा मौका तैयार किया गया। फील्ड वुक व खतौनी तैयार की जिसमें प्रत्येक मालिक व खरीददार का रकवा कव्जा मौका पाया गया। इंतकाल नं 927 तकसीम की अपील व स्थगन आदेश से कार्य भूव्यवस्था रोका गया और जो रिकार्ड विभाग द्वारा तैयार किया गया उसकी विभाग द्वारा कोई सहायता न ली गईऔर भूव्यवस्था विभाग द्वारा नये सिरे से कार्य आरंभ किया गया जिसमें 927 तकसीम में जो गलतीयां थी उसको कोई दुरुस्ती न की गई। जिसमें महाल लालसिंगी में में जो खरीदारहैं उनका रकवा काटा जा रहा है। इसलिए पहले ईन्तकाल नं 927 की गलतीयों की दुरुस्ती होनी चाहिए फिर उसका अमल द्रामद होना चाहिए और जिस हिस्सेदार से रकवा वै किया उसी हिस्सेदार से रकवा काट कर खरीदारान को दिलवाया जाए। यहीं नहीं मुजारा एक्ट के तहत गैरमरुसियों को लालसिंगी गांव में मालिकाना हक नहीं दिया जा रहा है। इसलिए आग्रह है कि लालसिंगी गांव के लोगों को उनका अधिकार दिलवाया जाए। ज्ञापन देने के लिए समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पूर्ण चौधरी,महासचिव कैप्टन अमरीक सिंह, उपाध्यक्ष कश्मीर सिंह, सचिव सुभाष कौंडल, ऊना खंड के अध्यक्ष अशोक चौधरी, गगरेट खंड के अध्यक्ष जसपाल चौधरी, अम्ब खंड के अध्यक्ष स्रवण सिंह, गगरेट खंड के सचिव रविन्द्र खसरु, गुलजारी लाल, सुरजीत कुमार, जीवन कुमार, ऐ. के. वर्मा, तिलक राज अत्री, प्रेम चंद, सुलोचना देवी, पुष्पिंदर कुमारी, शारदा देवी, रेखा कुमारी, मीना कुमारी,तोषिता, नरेन्द्र पाल,देविन्दर कुमार, मलकीयत सिंह राम पाल, राजीव कुमार व अन्य गांव वासी उपस्थित रहे।