विकास खंड बंगाणा ग्राम पंचायत बुधान की रहने वाली कविता देवी ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने प्रयासों से खेतों में रासायनिक खादों के स्थान पर जीवामृत तैयार कर किसानों के लिए एक नई दिशा दिखाई है। कविता ने बताया कि यह जैविक घोल पूरी तरह देसी सामग्री जैसे गोबर, गौमूत्र, बेसन, गुड़ और मिट्टी से तैयार किया जाता है, जो भूमि की उर्वरता बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है। कविता देवी ने बताया कि रासायनिक खादों के लगातार उपयोग से भूमि की शक्ति घट रही थी और उत्पादन भी प्रभावित हो रहा था। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने प्राकृतिक खेती का रास्ता अपनाया और जीवा अमृत बनाना शुरू किया। आज उनके प्रयोग से न केवल उनके खेतों की मिट्टी उपजाऊ बनी है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कविता के इस नवाचार से प्रभावित होकर आसपास के कई किसान भी अब पारंपरिक खेती छोड़कर जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जीवा अमृत से लागत घटती है, मिट्टी की सेहत सुधरती है और फसल में कीटों का प्रकोप भी कम होता है। कविता देवी का कहना है कि हमारी धरती मां है, उसे जहर नहीं, पोषण चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे जैविक खेती अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दें।