रामशहर के नजदीक सनेड़ में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद जी हरिद्वार ने भक्त ध्रुव और प्रहलाद से संबंधित प्रसंग सुनाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। उन्होंने कहा कि सत्संग से श्रद्धा और भक्ति आती है फिर संसार से विरक्ति हो जाती है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण के समान और कोई तप नहीं है। कथा में बैठते ही मन केंद्रित हो जाता है संसार से हटकर भगवान में लग जाता है जो सदा भगवान की लीला कथाओं को श्रवण करते हैं । भगवान उनकी व्यथा को एक न एक दिन अवश्य सुनते हैं।