स्वास्थ्य खंड धगेड़ा की ओर से वीरवार को नाहन में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें स्वास्थ्य खंड धगेड़ा के चिकित्सा अधिकारियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, स्वास्थ्य सुपरवाइजर और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इमरजेंसी देखभाल पर प्रशिक्षण दिया गया। खंड चिकत्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि कार्डिक अरेस्ट, स्टोक, जलने और डिजास्टर के मामले अकसर होते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों को इमरजेंसी उपचार की जानकारी होनी जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में डेमों के माध्यम से कार्डिक अरेस्ट के दौरान सीपीआर कैसे दी जाती के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक में पेरालिसिस का खतरा ज्यादा रहता है। यदि मरीज को एक से चार घंटे के बीच अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी रिकवरी की ज्यादा संभावनाएं रहती है। इसके अलावा कार्यक्रम में जलने के मामलों में किस तरह प्राथमिक उपचार दें के बारे में बताया गया। साथ ही आपदा में घायल मरीजों के उपचार के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि सीपीआर पद्धति में मरीज को 30 बार पंप किया जाता है। प्रत्येक पंप में पांच सेंटीमीटर तक दबाव बनाया जाता है। इस पद्धति से कार्डिक अरेस्ट के शिकार मरीज को इमरजेंसी उपचार देकर बचाया जा सकता है। इस अवसर पर स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर व अन्य चिकित्सा अधिकारी, सीएचओ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।