किन्नौर जिले में अलग-अलग त्योहार तथा मेले मनाए जाते हैं, जिनमें से कल्पा का प्रसिद्ध राउलने मेला भी एक है। इन दिनों यह मेला पांच दिनों तक मनाया जाता है। राउलने मेला लगभग सभी ग्रामीण क्षेत्रों में मनाया जाता है, लेकिन कल्पा गांव का यह मेला अत्यंत प्रसिद्ध है और एक देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। गौतम सिंह नेगी ने बताया कि सस्कर पर्व के बाद यह मेला लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि सस्कर पर्व में देवी-देवताओं का वास होता है तथा उनकी विदाई करने के बाद भी गांव से नहीं जाते हैं। उनकी विदाई के लिए यह मेला मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मेले में तीन किरदार होते हैं, जिनमें एक राउला, राउलने तथा पुंदलु (जो भेड़ बकरियों की खाल पहनते हैं)। राउला को पारंपरिक कोट-पेंट व गाछी से मुंह छुपाया जाता है। राउलने को पारंपरिक वेशभूषा के साथ किन्नौरी आभूषणों से मुंह छुपाया जाता है। इस मेले की यह खासियत है कि इस मेले में सिर्फ और सिर्फ पुरुष ही भाग लेते हैं। उन्होंने बताया कि यह मेला 22 मार्च तक इसी तरह मनाया जाएगा व इस मेले में सभी ग्रामीणों को भागीदारी बराबर होगी।