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Rampur Bushahr: चार लेबर कोड के खिलाफ सड़कों पर उतरे विभिन्न संगठन

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर रामपुर में भी विभिन्न संगठनों ने चार लेबर कोड के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। सीटू से संबंधित यूनियनों और हिमाचल किसान सभा के बैनर तले सैकड़ों कामगारों ने एनएच पांच पर उतर कर रोष रैली निकाली। सबसे पहले रामपुर के चौधरी अड्डे में प्रदर्शन किया गया। उसके बाद रोष रैली बाजार होकर एसडीएम कार्यालय परिसर पहुंची और काफी देर तक प्रदर्शन करते रहे। हिमाचल किसान सभा राज्य महासचिव राकेश सिंघा ने कहा कि यह आम हड़ताल श्रम संहिताओं को निरस्त करने को लेकर की गई। संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने पिछले कई वर्षों से उठाई जा रही अन्य मांगों को भी दोहराया है। इनमें न केवल मजदूर वर्ग की मांगें शामिल हैं, बल्कि मेहनतकश लोगों के सभी वर्गों की मांगें भी शामिल हैं। एमएसपी, शहरी क्षेत्रों में मनरेगा का प्रभावी कार्यान्वयन और विस्तार, रोजगार, महंगाई पर अंकुश, निजीकरण पर रोक, हमारे देश की संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े निजी घरेलू और विदेशी कॉरपोरेट्स को सौंपना शामिल है। वास्तव में यह हड़ताल भारत में नवउदारवादी हमले के खिलाफ एक वर्गीय और जन आंदोलन है। कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में कई मजदूर, कर्मचारी, किसान और आम जनता विरोधी कदम उठाए हैं। किसान, मजदूरों और मेहनतकश लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की नवउदारवादी नीतियों के चलते देश में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और खाद्य असुरक्षा पैदा हुई है। देश में अमीर और गरीबों के बीच खाई तेजी से बढ़ी है। गरीबों के संसाधनों को छीन कर अमीरों के हवाले किया जा रहा है। मजदूरों के संघर्षों और कुर्बानियों से बने 44 श्रम कानूनों को चार मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं (लेबर कोड) में बदल दिया गया है। इससे 74 प्रतिशत मजदूर सामाजिक और 70 प्रतिशत उद्योग सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने फिक्स टर्म रोजगार की अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है। इससे मजदूर नियमित रोजगार से वंचित हो जाएंगे। मजदूरों के काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर 12 घंटे करने की अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। प्रदर्शन के माध्यम से किसान मजदूर नेताओं ने चेताया है कि आने वाले समय में भारत का मेहनतकश लेबर कोड के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे और मजदूर विरोधी लेबर कोड को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को मजबूर करेंगे।

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