अंतरराष्ट्रीय लवी मेला अब अंतिम पड़ाव पर चल रहा है और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के कारोबारी अभी भी ग्राहकों के इंतजार में हैं। हालांकि 2 दिन बाद राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर सजी दुकानों को हटाने का आदेश प्रशासन जारी कर चुका है। वाद्य यंत्रों के कारोबारियों में निराशा छाई हुई है। कुछ साल पहले मेले में वाद्य यंत्रों का अच्छा खासा कारोबार हुआ करता था। अब स्थिति बिल्कुल विपरीत है। इस बार भी वाद्य यंत्रों के व्यापारी निराश ही दिखाई दे रहे हैं। कड़ी मेहनत करके तैयार किए गए ढोल, नगाड़े, करनाल, समेत मूर्तियों की खरीदार नहीं मिल रहे। कारोबारी एनएस सोनी और शरण दास ने कहा कि करीब पैंतीस साल तक वाद्य यंत्रों को हाथों-हाथ लेते थे, लेकिन समय के साथ अब वाद्य यंत्रों का कारोबार सिमटता जा रहा है।