रामपुर उपमंडल के विभिन्न इलाकों में प्लम सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। वहीं देश भर की मंडियों में प्लम की आवक बढ़ गई है और दाम भी धड़ाम से गिरे हैं। दाम गिरने से बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गौर हो कि शुरुआती दौर में बागवानों को प्लम के अच्छे दाम मिले थे और बागवान भी काफी खुश थे, लेकिन जैसे जैसे मंडियों में प्लम की आवक बढ़ने लगी तो दामों में भी गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ। सीजन के शुरुआती दौर में आजादपुर मंडी दिल्ली में सात किलोग्राम प्रति पेटी के 450 से 800 रुपये दाम मिल रहे थे, वहीं अब 300 से 600 रुपये दाम मिल रहे हैं, जो कि महंगाई के दौर में कम हैं। जबकि पांच किलो पेटी के 200 से 330 और चार किलो प्रति पेटी 170 से 250 रुपये तक ही बिक रही है। दामों में गिरावट आने से बागवान के चेहरों पर मायूसी छा गई है। प्रगतिशील बागवान बलवंत ठाकुर, दलीप सिंह, विजय राणा, रणवीर और राकेश सहित अन्य बागवानों ने कहा कि महंगाई के दौर में प्लम के वाजिब दाम न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिवर्ष मजदूरी, पेटियां और किराया बढ़ रहा है। वहीं खाद सहित अन्य सामग्री के दामों में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में बागवानों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। प्लम के दामों में गिरावट आने से बागवानों की आर्थिकी को झटका लग रहा है। उधर, एमएफसी सी 29 आजादपुर मंडी दिल्ली के आढ़ती अंशुमान धवन ने कहा कि मंडी में पांच किलोग्राम प्लम की पेटी 200 से 330 रुपये तक बिक रही है। इस वर्ष सूबे में प्लम की बंपर फसल होने के कारण अब प्लम के कारोबारियों को पेटियों की कमी खल रही है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से पहुंचे कारोबारी मोहम्मद राशिद, चुन्नू, हनुमान सहित अन्य कारोबारियों ने कहा कि रामपुर के कई इलाकों में फसल पकने से पहले ही प्लम की खरीदारी की थी। फसल का उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप अधिक होने से अब पेटियां खत्म हो गई हैं और क्रेट में ही प्लम को चंडीगढ़ सहित अन्य मंडियों को भेजना पड़ रहा है। वहीं प्लम के दाम भी अच्छे नहीं मिल रहे हैं।