सतलुज नदी पर निर्माणाधीन लूहरी जल विद्युत परियोजना के विस्थापित और प्रभावित अपने हकों से आज भी वंचित हैं। परियोजना के लिए जमीन देने वाले लोगों का न रोजगार मिल रहा है, न एकमुश्त राशि। प्रभावित पंचायतों के किसान दरारों और फसलों का मुआवजा नहीं मिल पाया है। किसान सभा ने बुधवार को किसानों की मांगों को लेकर परियोजना प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सभा ने चेताया कि यदि जल्द किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो किसान सभा परियोजना का काम बंद करवाएगी। हिमाचल किसान सभा लूहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित कमेटी नेा बुधवार को लुहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रभावित किसानों की मांगों को लेकर बिथल में विरोध प्रदर्शन किया। कमेटी की अध्यक्ष कृष्णा राणा, किसान सभा जिला अध्यक्ष प्रेम चौहान, पूर्ण ठाकुर, रणजीत और काकू कश्यप ने सरकार, प्रशासन और सतलुज जल विद्युत निगम पर किसानों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बुधवार को आर एंड आर की बैठक बिथल में हो तो रही है, लेकिन बैठक में किसानों की समस्याओं के समाधान पर चर्चा नहीं होती, केवल खानापूर्ति ही होती है। आज भी बरकेली गांव में 28 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें वर्ष 2021-22 का प्रदूषण का मुआवजा नहीं दिया गया है, जबकि समझौते में सतलुज जल विद्युत निगम ने बीते जुलाई माह में देने की बात मानी थी। परियोजना के निर्माण के लिए जिन लोगों ने जमीन दी है, उनमें से 128 परिवार ऐसे हैं, जिनको न तो एकमुश्त राशि मिली है और न ही उसके बदले रोजगार मिला। निथर उपतहसील की फाटी नित्थर, कोयल, बायल, ग्राम पंचायत शमाथला, भुट्टी, देलठ, नीरथ का प्रदूषण का सर्वे पूरा करने के बावजूद भी मुआवजा आज तक नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि ब्लास्टिंग से मकानों में आई दरारों का सर्वे ग्राम पंचायत नित्थर, करांगला, बड़ाच और भुट्टी में करने के बाद भी मुआवजा न मिलने से लोगों में रोष है। दुराह पंचायत में अब तक सर्वे ही नहीं किया गया है, जो सरकार, प्रशासन और सतलुज जल विद्युत निगम के प्रभावित पंचायतों के किसान विरोधी होने को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अभी यह प्रदर्शन केवल संकेत है, यदि समय रहते किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 6 मार्च से पूरी तरह से परियोजना का काम बंद किया जाएगा। इस मौके पर हरदयाल कपूर, अशोक, रघुवीर, नरेश चौहान, अंकुश, वीरेंद्र, कमलेश, भगवान दास, जय चंद, विमल, चंपा रोच, मान दास सहित अन्य मौजूद रहे।