मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा राहत के वितरण का कार्यक्रम मुख्यमंत्री ने अपनी भड़ास निकालने का कार्यक्रम बना दिया। ऐसे मौकों पर सरकार को संवेदनशीलता दिखानी होती है। लेकिन भाषायी स्तर पर हर मर्यादा तोड़ी गई। पूरे कार्यक्रम का राजनीतिकरण हो सके इसीलिए सरकार ने जानबूझकर विपक्ष के विधायकों को इस मौके पर नहीं बुलाया। मुख्यमंत्री कहते हैं कि विधायकों को बुलाया गया था तो वह कार्ड दिखाएं। इसके बाद सरकार के बेलगाम मंत्री जिस तरीके से यहां पर आकर बोले वह भी उनकी संवेदनहीनता और मानसिक स्थिति और मुख्यमंत्री की बेबसी का परिचय देता है। जयराम ठाकुर ने कहा कि 2023 से अब तक केंद्र सरकार द्वारा लगभग 5500 करोड रुपए और 1.11 लाख प्रधानमंत्री आवास हिमाचल प्रदेश को दिए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में संचालित हर योजना में केंद्र की बहुत भागीदारी होती ही है। लेकिन सरकार अब तक 5500 करोड़ का दसवां हिस्सा भी आपदा प्रभावितों पर खर्च नहीं कर पाई है। जिस कार्यक्रम का इतना शोर डाला जा रहा है उसमें मात्र 81 करोड़ रुपए आपदा प्रभावितों कोमिले हैं। उसमें भी सरकार द्वारा 4 महीने का समय लगाया गया है। 2023 में टूटी सड़कें आज तक वैसे की वैसी पड़ी हुई है। केंद्र द्वारा दिए गए पैसे मुख्यमंत्री लोगों तक पहुंचाएंगे तो बहुत मेहरबानी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अपने सभी नेताओं का टूर प्लान निकाल लें। उनके किसी भी नेता से कम मैं आपदा प्रभावितों से मिलने नहीं गया हूं। उनके नेता बेलगाम हो गए हैं। उनके मंत्री और विधायक उन्हें आंखें तरेरते रहते हैं। उनके आगे मुख्यमंत्री असहाय हैं। प्रदेश के कोने-कोने में आपदा आई। बिलासपुर में एक सड़क धंसने से ही 16 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री ने तो वहां जाना भी जरूरी नहीं समझा। ऐसे में उनके मंत्री और उनके द्वारा ऐसा शर्मा बयान देना उनकी संवेदनहीनता और समझ को प्रदर्शित करता है। जब प्रदेश में विधानसभा सत्र के दौरान आपदा पर चर्चा हो रही थी तो मुख्यमंत्री बिहार में बिना चुनाव ही चुनावी यात्रा कर रहे थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि हमने 1000 करोड़ की बिल्डिंगें बनाई हैं। हमने बनाई तो क्या गलत किया। जिस तरीके से आपने हमारे खोले गए हजारों संस्थान बंद कर दिएहैं। अगर आप चाहे तो उसी तरह से सारी बिल्डिंग्स को बुलडोजर लगा कर गिरा दीजिए। क्योंकि उसके अलावा आप कुछ कर नहीं सकते। ऐसी नकारात्मक सोच के साथ काम करने वाला मुख्यमंत्री आज तक प्रदेश को नहीं मिला। जो प्रदेश को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने में खुशी पाता हो। मुख्यमंत्री का रवैया कितना अमानवीय है कि उनकी पार्टी के छह विधायक और तीन विधायक जो उन्हें समर्थन दे रहे थे उनके रवैए से उन्होंने पार्टी छोड़ना ही उचित समझा।