पूरा हिमाचल प्रदेश आपदा के दौर से गुजर रहा है। ये समय लोगों के दुख-दर्द सुनने और व्यवस्था सुधारने का है लेकिन सारे काम छोड़ मुख्यमंत्री आपदा में लुका-छिपी कर रहे हैं। एक तरफ जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल के कांगड़ा आकर राज्य में आई आपदा का जायजा लिया और प्रभावितों से मिलकर उनका दर्द सुना। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुक्खू का ये असंवेदनशील चेहरा भी जनता ने देखा, जिनके लिए परिवार पहले है और जनता बाद में। नाचन के गोहर में जिला स्तरीय ख्योड़ मेले के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जनसभा के दाैरान तंज कसते हुए कहा कि ये सरकार ही अस्थाई है। काम करने के बजाय रोकने पर जोर दिया जा रहा है। कुछ देने के बजाय सबकुछ छिनने पर उतारू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को त्योहारी उत्सव में जीएसटी का सरलीकरण कर 12 और 28 प्रतिशत का जीएसटी समाप्त कर केवल पांच और 12 प्रतिशत ही रखकर तोहफा दिया है तो वहीं राज्य सरकार जनता पर और ज्यादा टैक्स लगाकर परेशान कर रही है। अभी सात रुपये प्रति बोरी सीमेंट के दाम रातोंरात बढ़ा दिए जबकि आपदा में लोगों को मकान बनाने में राहत देनी चाहिए थी। पंचायत चौकीदारों के बढ़ाए गए 25 रुपये तक भी वापस लेने का फैसला सरकार ने लिया है। प्रधानमंत्री ने 2023 की आपदा से लेकर अभी तक 5,500 करोड़ रुपये की सीधी मदद राज्य सरकार को भेजी है जबकि अब इसके अतिरिक्त 1500 करोड़ और फौरी राहत का पैकेज आपदा प्रभावितों की मदद के लिए देने की घोषणा की है लेकिन मुख्यमंत्री एक शब्द तक आभार का व्यक्त नहीं कर पाए।