महाशिवरात्रि पर्व से दो सप्ताह पूर्व ही मंडी जिले के नाचन और सराज घाटी में लोग शिवरात्रि को अनोखे अंदाज में मनाते हैं। दोनों क्षेत्रों में इन दिनों इस पर्व की धूम है। लोग अपनी मन्नतें पूरी होने पर भगवान शिव को खारका (बलि) देते हैं। शिवरात्रि के दौरान घाटी के लोग शिव की विशेष पूजा के लिए खारका मनाते हैं। खारका शिवजी के नाम एक कीर्तन है जिसे रातभर खाया जाता है और घर में शिव भगवान को बकरे की बलि चढ़ाई जाती है। इस दौरान पांच या सात लोग जिन्हें शिवजी के बंदे बुलाया जाता है, खारका में लगातार शिव-पार्वती के भजनों पर नाचते हैं। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्र बजते हैं और भोले का जयकारा लगता है। शिव को खारका के दौरान विशेष जड़ी-बूटी की माला पहनाई जाती है। इसी जड़ी-बूटी से शिव भगवान को धूप भी दिया जाता है। इससे शिव भगवान बेहद खुश होते हैं। खारका उत्सव में लोग शिव के लिए मीठे रोट बनाते हैं और कई दिनों तक लोग इन मीठी रोटियों को बतौर शिवजी का प्रसाद मानकर खाते हैं। शिवजी के गूर टेक चंद ने बताया कि खारका की परंपरा नाचन और सराज में कायम है। उन्होंने बताया कि खारका प्राचीन संस्कृति को संजोए हुए हैं।