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Mandi: जोगिंद्रनगर में 16 साल बाद बदली परंपरा, गणेश महोत्सव में नहीं होगा प्रतिमा विसर्जन

शहर में पिछले 16 वर्षों से चली आ रही गणपति विसर्जन की परंपरा इस वर्ष बदलने जा रही है। गणपति सेवा समिति ने गणेश महोत्सव के समापन पर गणपति की प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है। इस बार गणपति की प्रतिमा को धार्मिक प्रतिष्ठान में ही रखकर पूजा-अर्चना करने का फैसला लिया गया है। रविवार को सनातन धर्मसभा मंदिर में गणपति सेवा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में महोत्सव की तैयारियों और कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की गई। समिति के अध्यक्ष सचिन सूद ने बताया कि 14 सितंबर से 23 सितंबर तक दस दिवसीय गणेश महोत्सव आयोजित किया जाएगा। समिति के अनुसार गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणपति की प्रतिमा को सनातन धर्मसभा मंदिर में स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम, भजन संध्या और महाआरती का आयोजन होगा। शहर में गणपति महोत्सव के दौरान भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। आयोजकों के अनुसार धार्मिक आयोजनों में शहरवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गणपति सेवा समिति के अध्यक्ष सचिन सूद ने बताया कि शहर में पिछले 16 वर्षों से गणपति महोत्सव के समापन पर इको फ्रेंडली प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा चली आ रही थी। इस वर्ष समिति ने इस परंपरा में बदलाव करते हुए प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस बार महोत्सव का केंद्र पूजा-अर्चना, महाआरती और भजन संध्याएं रहेंगी। समिति के सदस्यों विशाल शर्मा, हरीश सोनी, अमित शर्मा, राजीव बहल और अंकित वालिया ने भी निर्णय का समर्थन किया। आयोजकों ने कहा कि 16 साल से चली आ रही विसर्जन परंपरा को बदलते हुए अब गणपति की प्रतिमा को धार्मिक प्रतिष्ठान में ही रखकर पूजा-अर्चना की जाएगी।

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