अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में उद्योग विभाग की ओर से लगाई गई सिल्क प्रोत्साहन प्रदर्शनी केंद्र आमजन को रेशम उत्पादन से जोड़ने और इसकी जानकारी प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रदर्शनी में लोगों को रेशम कीट पालन से लेकर धागा निर्माण और उससे बने उत्पादों तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी प्रदान की जा रही है। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में उद्योग विभाग की ओर से लगाई गई इस सिल्क प्रोत्साहन प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने वहां प्रदर्शित सिल्क बनाने संबंधी शहतूत की पनीरी, रेशम कीट सीड, रेशम से धागा बनाने की प्रक्रिया और रेशम से बने विभिन्न अन्य उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की। कहा कि रेशम उत्पादन घर बैठे रोजगार का प्रभावी माध्यम है। प्रदर्शनी में बताया गया कि रेशम मुख्यतः चार प्रकार का होता है मल्बरी, ओक, ऐरी और मूगा, जिनमें मंडी जिले में लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन मल्बरी सिल्क का होता है, जो यहां की जलवायु के अनुकूल है। मंडी जिले में लगभग 2,500 कृषक परिवार रेशम कीट पालन से जुड़े हुए हैं, जो सामूहिक रूप से करीब 9.56 मीट्रिक टन रेशम कोकून का उत्पादन कर रहे हैं। रेशम अधिकारी विजय चौधरी ने बताया कि एक कृषक परिवार रेशम कीट पालन से प्रतिमाह लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक आय अर्जित कर सकता है। बताया कि कोकून की कीमत उसकी गुणवत्ता के अनुसार निर्धारित होती है।