बंजार के अति दुर्गम गावों डिंगचा, खरुंगच्चा, काऊंचा और झलेरी गांवों में भी तीन दिवसीय फागली पर्व का सफल समापन हुआ। फागुन सक्रांति के अवसर पर आयोजित इस उत्सव के दौरान लकड़ी के मुखौटे पहनकर मढयालों ने चारों गांवों की परिक्रमा की और प्राचीन परंपराओं का निर्वहन किया। सबसे पहले देव अनंत काली नाग और रांदु नारायण की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पारंपरिक मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले दिन खरुंगच्चा और काऊंचा गांव में छोटी फागली मनाई गई, जबकि दूसरे दिन झलेरी और डिंगचा में उत्सव आयोजित हुआ। इस पर्व के समापन अवसर पर महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में सामूहिक नाटी डालकर माहौल को और भी रंगीन बना दिया।