जिला कुल्लू, मंडी, चंबा और कांगड़ा में टांकरी लिपि के अलग-अलग स्वरूप हैं और इन जिलों में टांकरी को लिखने का तरीका भी अलग-अलग है। ऐसे में टांकरी को सीखने, बोलने, लिखने और पढ़ने के लिए इसके विभिन्न स्वरूपों की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यह बात प्रशिक्षक एवं साहित्कार यतिन पंडित ने कही। जिला मुख्यालय कुल्लू के देवसदन में टांकरी लिपि पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला चल रही है। भाषा विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के युवा, लेखक, साहित्कार और शिक्षक टांकरी लिपि पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।