पौष महीने के खत्म होते ही जिला कुल्लू में फिर से देवी-देवताओं के सम्मान में मेलों का आयोजन शुरू हो गया है। जिले के साथ बंजार घाटी के अलावा साथ लगते मंडी के सराज में फागली उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। उपमंडल बंजार के थाटीबीड में भी मकर संक्राति की रात से फागली पर्व का आगाज हुआ। देवता बासुकी नाग और करथा नाग के सम्मान में मनाए गए फागली के दूसरे दिन बाद्य यंत्रों की थाप पर विष्णु स्वरूप माने जाने वाले मंडियाले नाचते हुए थाटीबीड़ में एक विशेष स्थान पर पहुंचते हैं। देवता संग नाचते हुए मंडियाले अश्लील गालियां देकर क्षेत्र से बुरी आत्माओं को भगाते हैं। वहीं, लोग मुंह में मुखौटे तथा शलुई नामक घास को लगाकर नृत्य करते हैं। दो दिनों तक मनाए गए इस पर्व को देखने के लिए दूर-दूर लोग पहुंचते हैं। इस मौके पर शाम को बीठ परंपरा को निभाया गया जो फागली पर्व का सबसे आकर्षक का केंद्र रहता है। नरगिस के फूलों से बने बीठ को पकड़ने के लिए लोगों में खूब जद्दोजहद हुई।आखिर में कटौला गांव के दुनी चंद ने नरसिंह के फूल को पकड़ा है। देर शाम तक कुल्लवी नाटी का दौर चलता रहा। मान्यता है कि जिसने बीठ को पकड़ा, उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।