तिब्बती शहीद लोबसांग पाल्डेन (उर्फ लोबगा रंगजेन) की ओर से चीन के लगातार दमन और हाल ही में लागू जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून के विरोध में खुद को आग लगाने की घटना के 20 अगस्त को 49 दिन पूरे हो गए। इस मौके पर 17वीं कशाग और 18वीं निर्वासित तिब्बती संसद संयुक्त रूप से धर्मशाला में एक शांति मार्च का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य उनके बलिदान का सम्मान करना और उन सभी तिब्बतियों को याद करना है जिन्होंने तिब्बत के मकसद के लिए अपनी जान दी है। लोबसांग पाल्डेन का यह सर्वोच्च बलिदान ऐसे समय में हुआ है जब चीन कानूनों और नीतियों के जरिये तिब्बत और अन्य कब्जे वाले या हाशिए पर पड़े क्षेत्रों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहा है। इन कानूनों और नीतियों का मकसद अलग-अलग राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और भाषाई पहचानों को खत्म करके उन्हें चीनी पहचान में मिलाना है।