हिमाचल प्रदेश के 32वें राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने राज्यपाल बनने के बाद पहली बार शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में पहुंचकर मां ज्वाला के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान राज्यपाल अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे, जहां मंदिर प्रशासन और पुजारी वर्ग द्वारा उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें माता की पवित्र चुनरी भेंट कर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने मंदिर परिसर स्थित मोदी भवन, शयन भवन, योगिनी कुंड और हवन कुंड का भी अवलोकन किया। उन्होंने विधिवत हवन में आहुतियां डालकर मां ज्वाला से प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इस अवसर पर पुजारी प्रधान दिव्यांशु भूषण शर्मा ने राज्यपाल को मंदिर के इतिहास, धार्मिक महत्व और यहां की प्राचीन परंपराओं की विस्तृत जानकारी दी। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें देवभूमि हिमाचल में सेवा का अवसर मिला है और मां ज्वाला के दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों की भूमि है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और सुव्यवस्थित प्रबंधन उपलब्ध करवाना बेहद आवश्यक है, ताकि वे यहां से सकारात्मक अनुभव और अच्छा संदेश लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भव्य कॉरिडोर विकसित कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया गया है। उसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में भी आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ज्वालामुखी, चामुंडा, नैना देवी, बगलामुखी और चिंतपूर्णी व अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के साथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है और यहाँ कोई भी इच्छा प्रकट की जाती है तो पूरी होती है, इसलिए यहां आस्था जुडी हुई है और दर्शन विदेश से श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। उन्होंने प्रदेश में बढ़ते नशे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को इस बुराई से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं और माता ज्वाला सभी पर अपना आशीर्वाद बनाये रखे, साथ ही उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेशवासियों की रक्षा के लिए मां ज्वाला से प्रार्थना की।