शिव मन्दिर तलाड़ा में जारी श्रीमद भागवत कथा में चौथे दिन श्री कृष्ण जन्म के साथ भक्तों में जय कन्हैया लाल की, जय यशोदा लाल की, आवाज से पंडाल भक्ति के रंग में रंग गया। वासुदेव जी द्वारा नन्हें लल्ला को टोकरी में उठाकर व्रज में ले जाते समय श्रीमद कथा का विस्तार करते हुए कथा व्यास स्वामी आदेश पुरी ने कहा कि निर्गुण महाशक्ति ही सगुण शरीर धारण करके अवतरित होती है।भूदेवी के प्रांगण में जब आसुरी शक्तियां उपद्रव करती हैं। तो गऊ, ब्राह्मण, संतों -भक्तों तथा सात्विक पुरुषों को अति पीड़ा होती है। हवन यज्ञ, पूजा-पाठ, शुभकर्म और धर्म से मुंह मोड़कर विधर्मी, अधर्म का रास्ता अपना लेते हैं।इसी अधर्म के बोलवाले पर द्वापर की शुरुआत पर पृथ्वी ने गाए का रूप धारण करके विष्णु लोक में जाकर अपनी व्यथा श्री हरि को सुनाई। ऐसे ने भगवान श्री हरि ने अपनी दिव्य शक्तियों को अधीन करके भूदेवी से पाप का भार उतारने के लिए अवतार लेकर व्रज वासियों व अन्य जगह में बसने वाले साधु पुरुषों को असुरों के बढ़ते अत्याचार से बचाया। आदेश पुरी ने बताया कि सगुण लीला करने के लिए ही परमात्मा सज्जनों का उद्धार, दुष्टों का संहार और सनातन धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने बताया कि श्री हरि का अवतार सनातन धर्म की रक्षा के लिए होता है। इस अवसर पर सीमा देवी, मंजू बाला, सोनू बाला, सुशील कुमार, तेज सिंह, राकेश कुमार उपस्थित रहे।