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तीन रुपये की पेपर स्ट्रिप बताएगी पानी कितना साफ, एनआईटी हमीरपुर ने तैयार की तकनीक

अब महज तीन रुपये की पेपर स्ट्रिप से पानी की गुणवत्ता का पता चल सकेगा। एनआईटी हमीरपुर के रसायन विभाग के शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने फलों और सब्जियों के रस से बने मॉलिक्यूलर और नैनो सेंसर तकनीक पर यह पेपर स्ट्रिप तैयार की है। खास बात यह है कि पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों की पहचान के साथ मोबाइल एप की मदद से धातुओं की मात्रा भी पता लगाई जा सकेगी। इस तकनीक से पानी में तांबा, लोहा, एल्युमिनियम, क्रोमियम, पारा और कोबाल्ट जैसे हानिकारक तत्वों की पहचान आसानी से की जा सकती है। एनआईटी हमीरपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. कल्याण सुंदर घोष के मार्गदर्शन में हमीरपुर निवासी शोधार्थी शिवानी शर्मा और अंकिता शर्मा ने यह शोध किया है। पेपर स्ट्रिप टेस्टिंग तकनीक के साथ विद्यार्थियों ने इस स्ट्रिप की जांच के लिए एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो स्ट्रिप के बदले हुए रंग से यह बताने में सक्षम होगा कि टेस्ट किए पानी में आयरन, क्रोमियम जैसे धातुएं कितनी मात्रा में हैं। मौजूदा समय में वायु के साथ जल प्रदूषण भी कैंसर जैसी घातक बीमारियां की वजह बन रहा है। ऐसे में शोध टीम ने पानी में मौजूद हानिकारक धातुओं की पहचान करने का सस्ता, सरल और त्वरित तरीका विकसित किया है। इस तकनीक से अब आम लोग भी एक साधारण स्ट्रिप की मदद से मिनटों में यह जान सकेंगे कि पानी सुरक्षित है या नहीं। हानिकारक तत्वों की मात्रा का पता लगाने के लिए रेड ग्रीन ब्लू (आरजीबी) स्केल तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसके लिए क्लोरीमीटर एप प्रयोग की गई है। आरजीबी वेल्यू को चेक बाद पानी में धातुओं की मात्रा स्पष्ट हो सकेगी।

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