प्रदेश में किसान जहरमुक्त खेती को अपनाकर सुरक्षित एवं पौष्टिक फल-सब्जियां तथा खाद्यान्न उगा रहे हैं। उपमंडल नादौन की ग्राम पंचायत कमलाह के गांव साधबड़ के अमर सिंह ने भी खेती की पारंपरिक विधि को अपनाया। आज वह अपने परिवार के साल भर के गुजारे के अलावा लगभग एक लाख रुपये तक की सब्जी स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं। कुछ वर्ष पूर्व अमर सिंह को पॉलीहाउस और प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने पॉलीहाउस और नर्सरी लगाई। प्रदेश सरकार की योजना के तहत अमर सिंह को दो दिन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया। प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी सामग्री तैयार करने तथा ड्रम इत्यादि पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। अब वह पूरी तरह प्राकृतिक खेती से ही अलग-अलग फसलें, सब्जियां और फलदार पौधे लगा रहे हैं। वह घर पर स्वयं ही गोबर, गोमूत्र, शक्कर और बेसन से जीवामृत तैयार कर रहे हैं तथा खेतों में इसी का छिड़काव कर रहे हैं। वह आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, गोभी, अन्य सब्जियां, सरसों तथा अन्य फसलें पूरी तरह प्राकृतिक खेती से ही उगा रहे हैं। परिवार की जरुरतो के अलावा वह स्थानीय बाजार में भी सब्जियां बेचकर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने अमरुद, पपीता, कीवी और अन्य फलदार पेड़ भी लगाए हैं।