अमलैहड़ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास बिहारी लाल भारद्वाज ने राधाकृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाया। राधा और कृष्ण का विवाह भांडीरवन में ब्रह्मा जी ने मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया था। यह एक गंधर्व विवाह था, जिसमें मौसम बदलने पर अचानक विवाह मंडप और सामग्री प्रकट हुई। नंद बाबा ने कान्हा को राधा को सौंपा और लौट गए. ब्रह्माजी ने विवाह कराकर दक्षिणा में श्री कृष्ण से उनके चरणों में भक्ति मांगी। विवाह के बाद, राधा और कृष्ण ने कुछ समय यमुना के तट पर बिताया। भांडीरवन आज भी इस दिव्य विवाह का गवाह माना जाता है और यहां राधा-कृष्ण के विवाह से जुड़ा एक मंदिर है। यह विवाह दर्शाता है कि राधा और कृष्ण के प्रेम को विवाह के बंधन में नहीं बांधा जा सकता, बल्कि यह एक दिव्य और निस्वार्थ प्रेम था।