धर्मशाला में रविवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल हुए। पूरे मार्ग पर "जय जगन्नाथ" के जयघोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक नारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को आकर्षक रथ में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ को खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। रथ यात्रा की सबसे विशेष परंपराओं में से एक रथ के आगे झाड़ू लगाने की रस्म भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने इसे सेवा, समर्पण, विनम्रता और समानता का प्रतीक बताते हुए पूरी श्रद्धा से निभाया। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों और धार्मिक वातावरण ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय मंदिर समिति, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहयोग दिया।