प्रदेश में नई होम स्टे नीति होम स्टे संचालकों के लिए गले का फांस बनती नजर आ रही है। नतीजतन, नई होम स्टे नीति को लेकर विरोध उठना आरंभ हो गया है। नई होम स्टे नीति के अनुसार अब होम स्टे का ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकरण करवाने के लिए प्रति वर्ष करीब छह हजार रुपये खर्च करने पड़ेंगे। जबकि, इससे पूर्व होम स्टे संचालकों को महज 100 रुपये की पंजीकरण फीस तीन वर्षों के लिए देनी पड़ती थी। वर्तमान नीति के अनुसार छह हजार रुपये पंजीकरण के मुताबिक तीन वर्षों में संचालकों को 18 हजार रुपये तक पंजीकरण के लिए खर्च करने पड़ेंगे। वहीं, साडा श्रेणी में आठ हजार व अर्बन श्रेणी में यह 12 हजार रुपये है। हिमाचल प्रदेश की नई होम स्टे नीति को लेकर जिला चंबा के होम स्टे संचालकों ने आपत्तियां जताई हैं। जिला चंबा के होम स्टे संचालकों रजत, राजेश, वेद व्यास, रजनीश, विनीत, अमित, मोहम्मद रफी का कहना है कि सरकार नई होम स्टे नीति के बारे में दोबारा विचार करें। इस नीति के बाद अब लोग होम स्टे का संचालन करवाने से घबराने लगे हैं। संचालकों ने कहा कि जिला चंबा में कई ऐसे होम स्टे हैं, जहां पर वर्षभर चंद लोग ही पहुंचते हैं। कई का पंजीकरण होने के बाद से अब तक कोई नहीं आया है। इसलिए होमस्टे को श्रेणियों में विभाजित किया जाना चाहिए।