माता-पिता का साया बचपन में ही सिर से उठ जाए तो जीवन का सफर बेहद कठिन हो जाता है। सदर तहसील के गांव ओयल निवासी शुभम ने भी ऐसे ही संघर्षों के बीच अपना बचपन और युवावस्था बिताई, लेकिन प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। आज शुभम न केवल आत्मनिर्भर हैं बल्कि अपने दम पर कारोबार स्थापित कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। वर्ष 2001 में जन्मे शुभम ने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण दादा-दादी ने किया। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन दादा-दादी ने हर कठिन परिस्थिति में उनका साथ दिया। समय के साथ परिवार पर एक और संकट तब आया जब दादा का भी निधन हो गया। घर में आमदनी का कोई साधन नहीं बचा और दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया। इसके बावजूद शुभम ने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष करते हुए 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने रोजगार की तलाश में हेयर ड्रेसिंग का काम सीखना शुरू किया, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण अपना काम शुरू करना आसान नहीं था। इसी दौरान मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना उनके लिए सहारा बनकर सामने आई। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग नरेंद्र कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 154 पात्र बच्चों और युवाओं को विभिन्न घटकों के माध्यम से लाभान्वित किया गया है। इस पर लगभग 1.69 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।