भीम आर्मी भारत एकता मिशन, यमुनानगर की ओर से शनिवार को विभिन्न जनहित के मुद्दों और भर्ती परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन के जिलाध्यक्ष प्रदीप गौतम के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ सादी वर्दी में मौजूद व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि उन्हें किस आधार पर तैनात किया गया था। इसके अलावा कथित रूप से अवधि समाप्त हो चुके आंसू गैस के गोलों के इस्तेमाल, प्रदर्शन स्थल पर की गई बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। संगठन ने पुलिसकर्मियों के पास मौजूद काले रंग की लाठियों के प्रयोग की भी जांच कराने तथा भविष्य में सभी पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों की वर्दी पर स्पष्ट और हाई-विजिबिलिटी नेम प्लेट अनिवार्य करने की मांग रखी। भर्ती परीक्षा सुधार संबंधी मांगों में संगठन ने नीट यूजी, जेईई मेन सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह पारदर्शी एवं सुरक्षित परीक्षा प्रणाली लागू करने, सरकारी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं का शुल्क समाप्त करने तथा महिला अभ्यर्थियों को उनके गृह जनपद या निकटवर्ती क्षेत्र में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही पेपर लीक और भर्ती घोटालों में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सभी विभागों में रिक्त पदों पर समयबद्ध भर्ती, राष्ट्रीय भर्ती कैलेंडर जारी करने और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई। जिलाध्यक्ष प्रदीप गौतम ने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि इन मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाती है तो युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास और मजबूत होगा। इस दौरान प्रदीप गौतम, अंकित छछरौली, मनदीप टॉपर, अधिवक्ता आशा सहित अन्य पदाधिकारियों ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। वक्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भर्ती परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का विरोध करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले युवाओं की आवाज को दबाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की।