जिले में सोमवार दोपहर हुई तेज बारिश से अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया। थोड़ी देर की बारिश से मंडियों में पानी ही पानी नजर आया। बारिश आने पर मजदूर तिरपाल लेकर धान को ढकने के लिए भागे, परंतु मजदूरों के पास पर्याप्त तिरपाल ही नहीं थे। सड़कों पर सुखाने के लिए धान की जो ढेरियां लगी हुई थीं। वह भी पानी में डूबी नजर आई। अनाज मंडियों में अभी तक एक लाख 20,205 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इसमें से 67650 एमटी धान का ही मंडियों से उठान अभी तक हो पाया है। 44 प्रतिशत धान अभी भी मंडियों में ही पड़ा है। धान से अटी पड़ी हैं बोरियां उठान धीमा होने से मंडियां धान की बोरियों से अटी हुई है। मंडियों में किसानों को धान सुखाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही। मंडियों में सड़कों पर जहां पर भी नजर जाती है वहां पर धान ही धान नजर आ रहा है। मजदूर दिनभर धान को सुखाने में लगे रहते हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि मंडी में किसान जिन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में धान लेकर आ रहे हैं उन्हें भी आढ़ती तक जाने की जगह नहीं मिल रही।