बीते तीन दिनों से यमुना का जलस्तर बढ़ने के बाद अब पानी कम होने लगा है, लेकिन धीरे-धीरे पानी कम होने की वजह से खेतों की मिट्टी का कटान होने लगा है, इस वजह से किसान परेशान हैं। नदी किनारे के गांवों में बाढ़ की वजह से किसानों की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है। खेतों की मिट्टी कटान का होने से उन पर कुदरत की दोहरी मार पड़ रही है। जिले में गन्नौर से दिल्ली बार्डर तक यमुना नदी के किराने करीब 30 गांव आते हैं। हर साल बाढ़ की किसानों को भारी क्षति का सामना करना पड़ता है। इस साल दूसरी बार यमुना का जलस्तर बढ़ा है। नदी किनारे के खेतों में धान, सब्जी, पशु चारा, बाजरा की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गईं। गांव बख्तारवरपुर, गढ़ी, मंहदीपुर, जैनपुर, गड्डी, टिकौला के बाशिंदे सबसे ज्यादा परेशान हैं। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ में उनकी फसलें चौपत हो जाती हैं,लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने ठोकरें नहीं बनवाई हैं। दो दिन पहले तक यमुना नदी में 82 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था, लेकिन अब करीब 60 हजार क्यूसेक पानी चल रही है। भंडार में भी करीब दो फीट की कमी आयी है, लेकिन किसानों की असली चिंता अब शुरू हुई है। पानी स्थिर होने से मिट्टी का कटाव अधिक होता है। हालत यह है कि बेबस किसान लाचार निगाह यमुना की तरफ निहारते हुए अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। सिंचाई विभाग के उप मंडल अभियंता ने बताया कि 80 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद से यमुना में जलस्तर बढ़ा था। अब धीरे धीरे पानी कम होगा। बांधों से और पानी छोड़ा जाता है तो स्थिति में बदलाव होगा।