मुंबई के कपड़ा करोबारी शिवचरण रामरतन गुप्ता संसार से सारे बंधन तोड़ कर चले गए। पिता की बीमार हालत का पता लगने के बाद से आते हैं-आते हैं कहती रही बेटियां उनकी अंत्येष्टि में भी नहीं आईं। ऑनलाइन वीडियो कॉल पर ही पिता की अंतिम विदाई देखने वाली बेटियों ने अस्थियां तक लेने से इनकार कर दिया। यह रिश्तों के पतन का असर था या उनकी विवशता, पता नहीं। कारण चाहे जो भी एक पिता अपने जिगर के टुकड़ों को आखिरी बार देख तक नहीं सके। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार भी वेस्ट रामनगर में वृद्ध आश्रम चलाने वाली समाज कल्याण शिक्षा समिति के पदाधिकारियों ने किया। समिति अध्यक्ष आनंद कुमार से बातचीत में यह सच सामने आया।